जल रही है ये नगरी तेरी

जल रही है ये नगरी तेरी
राजनीति की ही है ये हेरा फेरी
एकत्व है या खंडित है ये देश अपना
कलम उठी आक्रोश उगलने को ये मेरी

नागरिकता बढ़ाने का ये व्यापार है
गौर करो ये सरकार थोड़ी बीमार है
युवा पिट रहा है खाकी से हक के लिए
ये कहते है पकोड़ो से रोजगार है

एकता की परिभाषा इन्हे कौन सिखलाए
क्यों हीरोगिरी में कुछ चेहरे देश को चलाए
प्रजा को संतुष्ट न करपाए वो प्रजातंत्र कैसा
हक की लड़ाई में हर कोई कैसे मौन चिल्लाए

राज्यो पर अब राज हो रहा है
युवा और किसान हिम्मत खो रहा है
कोई अपनी बात करता है नहीं अब
लगता है जैसे, धोबी धुले कपड़े धो रहा है।
– Nitin poria #Citizenshipamedmentbill

Published by Nitin poria

CALM WITH AGGRESIVE ATTITUDE HAVING BUNDLES OF WORDS TO DESCRIBE EVERY PHASE OF LIFE.

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