हर गली तब सुनसान थी
इंसानियत भी बेजुबान थी
वक़्त भी सहम सा गया था मानो
नीयत जब उनकी हैवान थी
अंधेरे में रोशन चिराग है बहने
दरिंदगी ने छिने उसके शर्म के गहने
सबकी चौखट पर गई वो उस रात
आबरू ना लूटने दो मेरी बस ये कहने
आसमां भी आंसू छोड़ गया
खुदा से हर बन्दा मुंह मोड़ गया
ये बस प्रियंका की ही नहीं है कहानी
हर स्त्री का गर्व ये किस्सा तोड़ गया
यू बैठे रहने से क्या होगा
किसी रात फिर यही सब होगा
आंखें मूंद कर बैठी है जो सरकार
चौराहे पर गोली मारे उनको तभी कुछ भला होगा।
RIP Priyanka – Nitin poria