हर वक़्त की कदर , याद हो तुझे अगर
मुठ्ठी भर बातें करने की खातिर
कूद गया मै बेशर्मी कि डगर,
बेशर्मी को मेरी तुम गलत मत समझना,
जो आए मन में बेजीझक बोलना
तुम्हारी बेबात की हंसी हसा जाती हैं कभी
याद कर बस यही सब कुछ
वॉट्सएप में चैट खुल जाती है तभी
फिर थोड़ा मायूस होता हूं
थोड़ा नाराज होने का भी दिल करता है
बातो के मेरे बिस्तर पर
तेरा एक गुड नाइट का तकिया तक नहीं होता है
यूं तो कुछ भी नहीं बताने को मेरे पास
तुम कहोगी ऐसा क्या है मुझमें खास
अब बया नहीं कर सकता खासियत की हर बात
गुड नाइट का एक मेसेज भेज देना तुम बस किसी रात
तेरी आंखो में काजल की गहराई हैं कहती
हो अगर मन मर्जी मेरी तो तेरी आंखो में हर पल रहती
तेरे जिद्द करने से भी मैं
इठलाकर आंखो से ही कहती
ध्यान रखा करो खुद का
क्योंकि कोमलता की परछाई
तुम्हारे साए में है रहती।
-नितिन पोरिया