पहले पहले प्यार को दिल मे दबोचना
फिर सोचना
नई जगह खोजना,
कर कुछ ऐसा न हो आलोचना
बनू में तुझपे कभी बोझ ना
साथ देना ,बेवफाई का पचता मुझको डोज़ ना
तू फिर से सोचना
नया नही अब थोड़ा खास हु मैं तेरा दोस्त ना
तू बस हस , बस
कभी आंखों से आंसू तू ना छोड़ ना
तोड़ ना , कभी भी कोई वादा ना तोड़ना
जोड़ना थोड़े जज़्बात मुझसे अपने जोड़ना
बोलना जो दिल करे बेफिक्र मुझे बोलना
कभी हो नाराज तो वक़्त मुझको लगना
तुझको मनाने में भेजा मेरा फटना
पर मैं ना कभी थकना,
तुझे हसाने के वास्ते नया कुछ भी हैं मुझे करना
बोल ना , नया फ्लो तेरे को जमा के नही
रमता मैं जोगी तेरा रमता
गम था ज़िन्दगी में न कोई रंग था
भंग था सारा फ्यूचर मेरा भंग था
तेरे आने से पहले मैं बेरंग रंग था
लोहे में लगा जैसे कोई जंग था
ना जीने का कोई साला ढंग था
तेरी हँसी ने आंख मेरी चमकाई
आयी सपनो की रानी आई
चुराने चैन मेरा आई
लहराई, थोड़ी शरमाई ,धम से क्यों रुक गया मैं
साला सपना था ये तो फिर से पक गया मैं।
– नितिन पोरिया